नारी की स्थिति – भूत से वर्तमान तक


हमारे समाज में प्राचीन काल से लेकर आज के आधुनिक काल तक बहुत सी चीज़ों में बदलाव हुआ है तथा स्थिति सुधरी भी है, परन्तु नारी की स्थिति में बहुतअधिक परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसा नहीं है की नारी की स्थिति में बदलाव नहीं है, पर क्या वास्तव में उसका विकास हो पाया है ?

हमारे सविंधान में नारी की स्थिति को लेकर बहुत से प्रावधान हैं, जिनको लेकर विभिन्न कानून
भी बने हैं। पर आज भी पुरुषों के मुकाबले ऐसी बहुतायत महिलाएं होंगी जिन्हे इन सबके बारे
में पता तक नहीं।

शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ जाने के बाद भी वह किसी न किसी हिंसा में बहुत जल्दी ग्रसित हो जाती हैं। फिर चाहे यह हिंसा घरेलु हो या उनके बाहरी सुरक्षा की स्थिति – दोनों ही में हालत ख़राब ही है। यही कारण है कि आज दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार या घरेलु हिंसा की घटनाएं लगभग हर दिन के अखबार में आपको मिल जाएंगी। शायद शिक्षित होने से इसका कोई मतलब ही नहीं, या हमारी शिक्षा के तरीके में कुछ कमी रह गयी है।

यकीनन अभी बदलाव बाकी है, और यह बदलाव हमें अपने घर से करने की आवश्यकता है। हमारे परिवार में स्त्री का हर रूप मिलता है, फिर चाहे वह माँ , बहन, पत्नी, भाभी किसी रूप में मिले। हमें उसे प्यार, सम्मान और स्वतंत्रा जो की उसका अधिकार है देना होगा। यहीं से हमारे असल में शिक्षित होने का अनुभव प्राप्त होगा और यही शिक्षा हमें नारी के प्रति होने वाली हिंसा को रोकने में सफलता दिलाएगी।

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