संविधान के रक्षक के नाम से प्रसिद्ध धर्मगुरु का निधन

संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को बदला नहीं जा सकता, इस ऐतिहासिक फ़ैसले के प्रमुख याचिकाकर्ता रहे केशवानंद भारती का आज निधन हो गया है। वे 79 वर्ष के थे।

केशवानंद भारती इडनीर मठ के प्रमुख थे। मठ के वकील आई वी भट ने बीबीसी को बताया, “अगले हफ़्ते भारती की हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी होनी थी, लेकिन रविवार सुबह अचानक उनकी मृत्यु हो गई.”

केशवानंद भर्ती का निधन इडनीर के अपने आश्रम में हुआ और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।

केशवानंद भारती का नाम भारत के इतिहास में दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘केशवानंद भारती बनाम स्टेट ऑफ़ केरल’ मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था जिसके अनुसार ‘संविधान की प्रस्तावना के मूल ढांचे को बदला नहीं जा सकता।

इस फ़ैसले के कारण उन्हें ‘संविधान का रक्षक’ भी कहा जाता था। हालांकि जिस मामले के लिए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था, उसका विषय अलग था।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सबसे लम्बे समय 68 दिन तक 1972-73 में चला था। इसमें 13 जजों की बेंच ने संसद की शक्तियों पर फैसला सुनाया था। यह फैसला बाद में भारतीय संविधान के लिए एक मिसाल बन गया।